मनुष्य के अंदर विद्यमान सत्य अस्तित्व आत्मा जब विजातीय असत्
प्रकृति के साथ मोंह सम्बंध कर लेती है तो फलत: अस्थिरता, उद्विग्नता, अनिश्चय की मानसिक स्थितियाँ जन्म
लेती हैं । गुरू द्वारा सुझाये गये निदान, मोंह का त्याग करने में क्लेष उठाना पडता है । इसी को तपस्या कहा
जाता है । परंतु सत्य को पाने के लिये तपस्या अनिवार्य होती है ।