रविवार, 21 दिसंबर 2014

पूर्णता का चर्मोत्कर्ष

मनुष्य शरीर द्वारा पूर्णता प्राप्त करने का अंतिम पडाव होता है, जब वह बिना कर्म फल की कामना किये अपने समस्त कर्म दायित्वों का सम्पादन करने लगता है । दूसरे शब्दों में मनुष्य जब बिना कर्मफल की कामना किये अपने कर्म दायित्वों को करने लगता है तो यह उसकी इस मानव शरीर द्वारा चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है । 

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