परम् लक्ष्य
मंगलवार, 23 दिसंबर 2014
लोक संग्रह हेतु
मुक्त मनुष्य अपने कर्म दायित्वों को ईश्वर के आदेश के रूप में ग्रहण कर संसार के समस्त जीवों के हित के लिये ईश्वर की सेवा के भाव से करता है । यह मनुष्य शरीर द्वारा अपने उत्थान के लिये किये गये प्रयत्नों की सर्वोच्च उपलब्धि होती है ।
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