इस नश्वर संसार के अस्तित्व का
सत्य आधार परम् ब्रम्ह के सत्य स्वरूप को जानना । इस संसार के समस्त रूपों में
परम् सत्य के विद्यमान रूप को सत्य रूप में जानना । यह इस संसार में मनुष्य शरीर
द्वारा उत्थान के लिये किये जा रहे प्रयत्नों की चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है । इस
उपलब्धि द्वारा मनुष्य परम् सत्य में विलीन हो जाता है ।
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