शुक्रवार, 26 दिसंबर 2014

कर्म का लक्ष्य

कंचिद यदि परम् ब्रम्ह का ध्यान करना असाध्य प्रतीत होवे । कंचिद यदि परम् ब्रम्ह का चिंतन करना, मस्तिष्क की विषयों में चंचलता के कारण सम्भव ना होवे । तो भी यदि किये जाने वाले प्रकृति के समस्त कर्मों को परम् ब्रम्ह को अर्पित करके किया जाय तो परिणामत: कर्ता परम् ब्रम्ह में विलीन हो जाता है । 

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