परम् ब्रम्ह इस सृष्टि के समस्त
कार्यों को प्रकृति के माध्यम से कर रहे हैं । एकाकी मनुष्य मात्र यंत्रवत्
प्रकृति के कार्यों को करने का अधिकारी होता है । यह ज्ञान है । परम् सत्य को
समर्पित रहना भक्ति है । भक्ति से युक्त होकर प्रकृति के कार्यों को करने वाला
व्यक्ति परम् द्रम्ह में लीन होता है । यह मनुष्य शरीर द्वारा उत्थान के प्रयत्नों
की चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है ।
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