बुधवार, 31 दिसंबर 2014

ब्रम्हस्थिति

आत्मा की प्रधानता का जीवन भोग करना । ब्रम्ह की गरिमा का जीवन यापन । प्रकृतीय मोंह से मुक्त जीवन । इस स्थिति का जीवन जीते मनुष्य ब्रम्ह में विलय के लिये सुपात्र बन जाता है । मनुष्य शरीर द्वारा उत्थान के प्रयत्नों में यह चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है । 

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