बौद्ध धर्म में निर्वाण पूर्णता की
स्थिति को कहा जाता है । शंकर निर्वाण को मोक्ष बताते हैं । निर्वाण सर्वोच्च आनंद
की स्थिति को कहा गया है । ब्रम्ह में आत्मा का विलय – निर्वाण । निर्वाण की स्थिति मिल
जाने पर पुन: प्रकृतीय मोंह में वापस लौटने की सम्भावना नहीं रह जाती है । मनुष्य
शरीर द्वारा उत्थान के प्रयत्नों में यह चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है ।
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