रूपों के संसार की उच्चतम् सीमा
होती है ब्रम्हलोक देवलोक । देवताओं का संसार । यह परम् सत्य नहीं होता है । यह
मात्र रूपों के संसार की अंतिम सीमा का ज्ञोतक होता है । इस लोक तक के प्रत्येक
रूप में परम् सत्य छिपा होता है । परंतु वह रूप उस परम् सत्य की उपस्थिति से
अनभिज्ञ होते हैं । उसी छिपे हुये परम् सत्य को जानना ही प्रत्येक रूप के लिये
सर्वोच्च लक्ष्य होता है । जिस समय स्थल पर प्रत्येक रूप उस छिपे हुये परम् सत्य
को जान जावेंगे इस संसार की उत्पत्ति का लक्ष्य पूरा हो जावेगा । उस समय स्थल पर
पूरा संसार उस परम् सत्य में विलय कर जावेगा ।
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