मंगलवार, 20 जनवरी 2015

देवलोक

रूपों के संसार की उच्चतम् सीमा होती है ब्रम्हलोक देवलोक । देवताओं का संसार । यह परम् सत्य नहीं होता है । यह मात्र रूपों के संसार की अंतिम सीमा का ज्ञोतक होता है । इस लोक तक के प्रत्येक रूप में परम् सत्य छिपा होता है । परंतु वह रूप उस परम् सत्य की उपस्थिति से अनभिज्ञ होते हैं । उसी छिपे हुये परम् सत्य को जानना ही प्रत्येक रूप के लिये सर्वोच्च लक्ष्य होता है । जिस समय स्थल पर प्रत्येक रूप उस छिपे हुये परम् सत्य को जान जावेंगे इस संसार की उत्पत्ति का लक्ष्य पूरा हो जावेगा । उस समय स्थल पर पूरा संसार उस परम् सत्य में विलय कर जावेगा । 

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