रविवार, 4 जनवरी 2015

ब्रम्ह निर्वाण

जिस मनुष्य में आत्मचेतना जागृत हो गई है । जिस मनुष्य को अपने अंत:करण में समस्त आनंद की अनुभूति अनुभव होने लगी है । जो मनुष्य अपनी आत्मानुभूति में हर्षित रहता है । जिस मनुष्य को अपने अंत:करण में ज्ञान ज्योति के दर्शन मिलने लगाते हैं । ऐसे योगी को ब्रम्ह की स्थिति प्राप्त होती है । 

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