जिस मनुष्य में आत्मचेतना जागृत हो
गई है । जिस मनुष्य को अपने अंत:करण में समस्त आनंद की अनुभूति अनुभव होने लगी है
। जो मनुष्य अपनी आत्मानुभूति में हर्षित रहता है । जिस मनुष्य को अपने अंत:करण
में ज्ञान ज्योति के दर्शन मिलने लगाते हैं । ऐसे योगी को ब्रम्ह की स्थिति
प्राप्त होती है ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें