परम् लक्ष्य
शनिवार, 3 जनवरी 2015
अखण्ड समर्पण
योगेश्वर श्रीकृष्ण
बताते हैं कि जो भी मनुष्य मुझमें अखण्ड समर्पित भाव से युक्त हो अपने को प्रस्तुत करता है वह प्रकृतीय गुणों के बंधन से मुक्त हो जाता है । मुक्ति के परिणाम से वह मुझमें विलय के लिये योग्य पात्र बन जाता है ।
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