रविवार, 11 जनवरी 2015

पूर्ण तारतम्य

मुक्त आत्मा के मनुष्य सिद्धपुरुष की शरीर, मस्तिष्क और आत्मा एक तारतम्य में प्रतिपल बिना किसी त्रुटि के कार्य करते है । उसका कोई भी कार्य चाहे वह चेतन दशा में किया गया होवे, अथवा अर्धचेतन दशा में किया गया होवे, अथवा अचेतन दशा में किया गया होवे उनमें बिना किसी अपवाद के उसकी शरीर, मस्तिष्क और आत्मा एक तारतम्य में ही पाये जाते हैं । 

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