मनुष्य द्वारा अपने अंदर विद्यमान
परम् सत्य का सत्य अनुभव पाना ही जीवन की सर्वोत्कृष्टि उपलब्धि होती है । उस सत्य
अनुभव तक पहुँचने के लिये तथा उस सत्य अनुभव के प्राप्त होने के उपरांत भी उसे
व्यक्त करने के यत्न के लिये बौद्धिक ध्यान, भक्ति-पूर्ण समर्पण तथा योगावस्था
में कार्य यह सभी मात्र साधन हैं ।
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