एक योगी का स्वरूप हर्ष, पवित्रता, आत्मचेतना, मोंह से मुक्ति, कर्म के लिये साहस एवं शक्ति और
सतत् ब्रम्ह के ध्यान में संलग्न होता है । योगी का अस्तित्व सात्विक आचरण और
विवेक का जीवित उदाहरण होता है । मनुष्य का जीवन स्वार्थ और मोंह से ऊपर उठ एक नये
उच्च आदर्शों के धरातल पर जीने का स्वरूप एक योगी का जीवन होता है । मनुष्य शरीर
द्वारा उत्थान के प्रयत्नों में यह चर्मोत्कर्ष उपलब्धि होती है ।
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