मुक्त आत्मा अपने उद्गम श्रोत
ब्रम्ह के प्रतिनिधि के रूप में आचरण करे । मुक्त आत्मा ब्रम्ह की प्रेरणा द्वारा
कार्य करे । मुक्त आत्मा ब्रम्ह की शक्ति द्वारा कार्य करे । यह ब्रम्ह में विलय
का स्वरूप होगा । जो भी मनुष्य इस स्थिति को प्राप्त कर सके वह सिद्ध पुरुष होगा ।
एक ऐसा पुरुष जिसके लिये ब्रम्ह सदैव विद्यमान है ।
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