इस रूपों के संसार में प्रत्येक
रूप के सृजन का विज्ञान होता है । रूप का सृजन विज्ञान द्वारा ही सम्भव हुआ है ।
आनंद मुक्त दशा है । आनंद परम् सत्य नहीं है । अपने अंदर विद्यमान परम् सत्य का
अनुभव मिलने पर अनुभूति आनंद की दशा सृजित करती है । आत्मा जबतक परवश प्रकृति के
मोंह से बँधा है त्रसित दशा का भोक्ता रहता है । मुक्त आत्मा आनंद भोग करती है । आनंद
मनुष्य के विकास की उच्चतम् सीमा होता है ।
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