शनिवार, 17 जनवरी 2015

पूर्णता का संसार

परम् सत्य ने इस संसार के लिये जो लक्ष्य निर्धारित किया है और प्रकृति उस लक्ष्य की पूर्णता के लिये प्रत्येक व्यक्ति को अवसर प्रदान करती है वह लक्ष्य होता है उस परम् सत्य को जानना । तर्क यह प्रश्न उत्पन्न करता है कि उपरोक्त लक्ष्य की प्राप्ति के उपरांत इस संसार का क्या स्वरूप होगा । यह कहना कठिन है । वह परम् सत्य जो असँख्य सम्भावनाओं का धारक है सम्भवतया अपने को व्यक्त करने के लिये किसी भिन्न सम्भावना को प्रस्तुत करेगा । 

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